गर्भावस्था में शिशु का विकास कैसे होता है? : Baby Growth During Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में शिशु का विकास कैसे होता है?

मां के गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास की प्रक्रिय 9 महीने के दौरान बहुत ही रोचक होती है। नौ महीने बाद शिशु का जन्म होता है।  होने वाले माता पिता जानने को उत्सुक होते हैं की आने वाला नन्हा सा बच्चा कैसे बढ़ रहा होगा। इस लेख में आपको जानने में मदद मिलेंगी की आपके बच्चे का विकास कैसे हो रहा है।  मां के शरीर में पनपती नन्ही सी जान की विकास प्रक्रिया बहुत अहम होती है। मां के गर्भ में पल रहा नहा सा बच्चा लाखों में नही बल्कि करोड़ों में से एक होता है।


Baby Growth



क्योंकि पुरुष के स्पर्म करोड़ों में निकलते है। उनमें से एक स्पर्म एक अंडाणु के सम्मेलन से एक नन्ही सी जान बनता है। तो हो गया न आपका बच्चा करोड़ों में से एक। मां के पेट में पल रहे बच्चे का विकास धीरे धीरे एक के बाद विकसित होता है। लेख में जानें गर्भावस्था में शिशु का विकास कैसे होता है? Baby Growth During Pregnancy in Hindi बच्चे के विकास से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य।


पहली तिमाही में शिशु का विकास 

1. गर्भ धारण होते ही महज चौथे से पांचवे सप्ताह में शिशु का दिल धड़कना शुरू कर देता है। शिशु के धड़कन की गति गर्भावस्था के दौरान नॉर्मल आदमी की धड़कन से दोगुनी होती है। उस समय शिशु के दिल की धड़कन 157 प्रति मिनट होती है। उस समय शिशु का आकार मात्र पोस्तादाना जितना होता है।

2. छह हप्ते में शिशु का आकार राजमा के दाने जितना हो जाता है। और उसका चेहरा और जनन अंग विकसित होने लगते हैं। इस दौरान शिशु भोजन और सोने के नियम का पालन करने लगता है। गर्बावस्था में शिशु की हलचल अठवे सप्ताह में ही शुरू हो जाती है। लेकिन यह मां को कुछ समय बाद महसूस होती है। लेकिन यह हलचल मां को 18वे सप्ताह में महसूस होने लगती है।

3. नौ से लेकर 12 हप्तो में शिशु के बाल आने लगते हैं। इस दौरान सबसे पहले शिशु की आईब्रो बनने लगती है। इसके बाद शिशु के शरीर के हल्के रोएं पूरे शरीर में आने लगते है। ये रोएं शरीर में आवरण का काम करते है। जिसकी वजह से शिशु को गर्भावस्था में ठंडी से बचाता है।



दूसरी तिमाही में शिशु का विकास

1. 13 हप्तो में शिशु के सभी मुख्य अंग विकसित हो जाते हैं। और विकसित अंग कार्य करने लगते है। 13वे सप्ताह के दौरान शिशु का आकार महज बंद मुट्ठी के जितना होता है। इस दौरान मां को कम मितली होने लगती हैं। 15वे सप्ताह में शिशु को प्रकाश का अनुभव होने लगता है।

2. 17वे सप्ताह में शिशु के हाथों के फिंगर प्रिंट बन जाते है। और सारी उम्र उसके साथ रहते है। गर्भनाल मां के शरीर का करीब 35 प्रतिशत रक्त शिशु को 500 मिली प्रति मिनट की दर से पहुंचती रहती है। 20वे सप्ताह में शिशु प्रतिदिन तीन टेबल स्पून मूत्र उत्सर्जित करने लगता है। इस दौरान शिशु 10 इंच लंबा और लगभग 398 ग्राम का हो जाता है।

3. 24वे सप्ताह में शिशु के कान पूरी तरह विकसित हो जाते हैं। जिससे वह गर्भ में रहते हुए बाहरी आवाजे सुन सकता है। इस दौरान मां की आवाज शिशु को अच्छी तरह से सुनाई देने लगती है।



तीसरी तिमाही में शिशु का विकास

1. शिशु की आंखे 26वे सप्ताह में खुलने लगती है। परंतु गर्भ में उसको अंधेरा ही दिखाई देता है। गर्भावस्था के अंतिम तिमाही में शिशु के शरीर में वसा प्रतिदिन एक औंस बढ़ने लगती है। इस तिमाही में शिशु के फेफड़े पूरी तरह विकसित हो जाते हैं। इस दौरान शिशु की लाते मां को महसूस होने लगती हैं।


2. 32वे हफ्ते में शिशु का शरीर स्पर्श को लेकर संवेदन शील हो जाता है। उस दौरान शिशु को दर्द का एहसास होने लगता है। आठवें महीने में शिशु की हड्डियां मजबूत होने लगती हैं।

3. प्रसव काल के नजदीक आते आते शिशु गर्भाशय में सामान्य आकार से 500 से 1000 गुना बढ़ जाता है। नौवे महीने में शिशु का विकास पूरी तरह विकसित हो चुका होता है। इस समय आपका बच्चा कभी भी बाहर आने के लिए तैयार है।
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